Radha Krishna aarti video and lyrics from Rangeeli Mahal, Barsana

August 23, 2010 04:45 by anisha

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुन सिर कनक मुकुट छलके

दुहुन श्रुति कुण्डल भल हलके

दुहुन दृग प्रेम सुधा छलके

चसीले बैन, रसीले नैन, गसीले सैन

दुहुन मैनन मनहारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

दुहुनि दृग चितवनि पर वारी

दुहुनि लट लटिकनि छवि न्यारी

दुहुनि भौं मटकनि अति प्यारी

रसन मुख पान, हंसन मुस्कान, दसन दमकान

दुहुनि बेसर छवि न्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक उर पीतांबर फहरे, एक उर नीलांबर लहरे

दुहुन उर लर मोतिन छहरे

कनकानन कनक, किंकिनी झनक, नुपुरन भनक

दुहुन रुन झुन धुनि प्यारी की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की

एक सिर मोर मुकुट राजे

एक सिर चूनर छवि साजे

दुहुन सिर तिरछे भल भ्राजे

संग ब्रजबाल, लाडली लाल, बांह गल डाल

‘कृपालु’ दुहुन दृग चारि की

कि बनवारी नथवारी की

आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की


 

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 43 of 144, Virah bhaav

August 9, 2010 01:37 by anisha
Krishna and Meera, Braj ke sawaiya

४३.

मनमोहन सों बिछुरी जबसों तन आँसुन सौ सदा धोवती हैं।

‘हरिचन्द’ जू प्रेम के फन्द परी कुल की कुललाजहिं खोवती हैं॥

दुख के दिन को काहू भाँति बितै विरहागिन रैन संजोवती हैं।

हम ही अपनी दशा जाने सखी निसि सोवती हैं किधौं रोवती हैं॥

More sawaiya verses in Braj bhasha


 

Guru bhajan by Surdas, Druhn in charnan kero bharoso

July 22, 2010 13:42 by anisha

दृढ़ इन चरनन केरो भरोसो, दृढ़ इन चरनन केरो

श्री वल्लभ नख चन्द्र छटा बिन, सब जग मांझ अंधेरो

साधन और नहीं या कलि में, जासो होत निबेरो

सूर कहा कहे दुविध आंधरो, बिना मोल को चेरो

Surdas and SrinathjiSurdas wrote this bhajan in Braj bhasha for his Guru, Mahaprabhu Vallabhacharya. Surdas was a blind poet and musician, one of the Asht sakhas of Sri Govardhan Nath ji (now at Nathdwara, near Udaipur) who was at Govardhan hill (near Vrindavan) during Surdas’s lifetime. Suradas breathed his last in Braj. This song speaks of his faith in the Guru and his teachings.

Khanjan Nayan is a beautiful biography of Surdas by Amrit Lal Nagar, a famous writer from Chowk in Lucknow.

A bhajan video: Surdas


 

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 42 of 144

July 16, 2010 13:28 by anisha

४२.

मोरपखा गल गुंज की माल किये बर बेष बड़ी छबि छाई।

पीत पटी दुपटी कटि में लपटी लकुटी ‘हटी’ मो मन भाई॥

छूटीं लटैं डुलैं कुण्डल कान, बजै मुरली धुनि मन्द सुहाई।

कोटिन काम ग़ुलाम भये जब कान्ह ह्वै भानु लली बन आई॥


 

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 41 of 144

June 30, 2010 10:22 by anisha

४१.

अन्त रहौ किधौं अन्तर हौ दृग फारे फिरौं कि अभागिन भीरूं।

आगि जरौं या कि पानी परौं, अहओ कैसी करौं धरौं का विधि धीरूं॥

जो ‘घनआनन्द’ ऐसौ रूची, तो कहा बस हे अहो प्राणन पीरूं।

पाऊं कहां हरि हाय तुम्हें, धरनी में धंसूं कि अकाशहिं चीरूं॥


 

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 40 of 144

June 30, 2010 10:20 by anisha

४०.

संकर से मुनि जाहि रटैं चतुरानन चारों ही आनन गावैं।

जो हिय नेक ही आवत ही मति मूढ़ महा ‘रसखान’ कहावैं॥

जापर देवी ओ देब निह्हरत बारत प्राण न वेर लगावैं।

ताहि अहीर की छोहर्या छछिया भर छाछ पै नाच नचावैं॥


 

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 38 of 144, Prayer to Krishna

June 23, 2010 06:20 by anisha

३८.

ऐसी करा नव लाल रंगीले जू चित्त न और कहूं ललचाई।

जो सुख दुख रहे लगि देहसों ते मिट जायं आलोक बड़ाई॥

मागति साधु वृन्दाबन बास सदा गुण गानन मांहि विहाई।

कंज पगों में तिहारे बसौं नित देहु यहै ‘ध्रुय’ को ध्रुवताई॥